
उन्होंने कहा कि सद्गुरु भगवंत सबसे श्रेष्ठ कल्याणकारी मित्र हैं। माता-पिता भी कल्याणकारी मित्र हो सकते हैं, लेकिन आध्यात्मिक जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। उन्होंने आगाह किया कि मूर्ख व्यक्ति से कभी मित्रता नहीं करनी चाहिए। स्वस्थ शरीर मिलना पुण्य का फल है, लेकिन यदि मन को गलत दिशा में लगाया जाए तो वही पाप के बंधन का कारण बन जाता है।
49 दिवसीय पंच परमेष्ठी श्रेणी तप शुरू
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुणीया व महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि पंच परमेष्ठी श्रेणी तप की शुरुआत 2 अगस्त से हो गई है। बड़ी संख्या में आत्म कल्याण के लिए श्रावक-श्राविकाओं ने तप का संकल्प लिया। धर्मसभा में तप की विधि गुरु भगवंत के मुखारविंद से शास्त्रविधि के अनुसार हुई। अक्षत कलश की स्थापना की गई। देववंदन,वधावना और कलश को अक्षत कलश से भरा गया। वही दोपहर 2:30 से 4 बजे तक 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए ज्ञान,संस्कार कार्यशाला का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में बच्चों ने गुरु भगवंत से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया।
तपस्वियों का सम्मान, सभी ने की अनुमोदना
पंच परमेष्ठी श्रेणी तप के कलश की स्थापना के पश्चात तपस्वियों का सम्मान किया गया। तपस्वियों का माला से सम्मान करने का लाभ गौतमचंद, अभिषेक कुमार लोढ़ा परिवार को मिला। अक्षत,श्रीफल और रोकड़ से बधावने का लाभ पानी बाई आसकरण भंसाली परिवार कल्प वृक्ष को मिला। कलश स्थापना का लाभ हेमीबाई, पुखराज जी लुनिया परिवार को मिला। चातुर्मास में तपस्या का क्रम निरंतर जारी है।