धार, 6 नवम्बर, 2026: कहते हैं यदि मन में कुछ करने की सच्ची लगन हो, तो कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती। धार जिले की 26 वर्षीय अश्विन्ता ने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 10वीं की परीक्षा पास करके सफलता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। उनकी यह सफलता साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी रुकावट आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
बीमारी और लॉकडाउन ने रोक दी थी पढ़ाई
अश्विन्ता को बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक था। साल 2019 में जब वे 10वीं में थीं, तब अपेंडिक्स के ऑपरेशन की वजह से उनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई। इसके कुछ समय बाद कोरोना का लॉकडाउन लग गया। फिर उनकी शादी हो गई और परिवार की जिम्मेदारियाँ बढ़ती चली गईं।
आज अश्विन्ता अपने पति बलराम, सास-ससुर, एक साढ़े तीन साल की बेटी और एक छोटे बेटे के साथ रहती हैं। उनके पति मजदूरी करते हैं, जबकि अश्विन्ता घर की किराने की दुकान चलाती हैं, सिलाई करती हैं और खेती के काम में भी पति का हाथ बंटाती हैं। इन सबके बीच भी उनकी पढ़ने की इच्छा कभी खत्म नहीं हुई।
'प्रेरक दीदी' और परिवार का मिला साथ
अश्विन्ता को नई उम्मीद तब मिली, जब गांव की 'प्रेरक दीदी' दुर्गा ने उन्हें 'प्रगति कार्यक्रम' के बारे में बताया। दुर्गा ने अश्विन्ता के सास-ससुर से बात की और उन्हें अपनी बहू को आगे पढ़ाने के लिए राजी किया।
अश्विन्ता ने प्रगति कैंप में जाकर फिर से पढ़ाई शुरू की। उनके लिए संस्कृत विषय थोड़ा मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इस सफर में उन्हें परिवार का पूरा साथ मिला। जब वे पढ़ाई के लिए कैंप जाती थीं, तब उनके पति बलराम घर पर बच्चों की देखभाल करते थे। सास-ससुर ने भी कभी उन्हें घर से बाहर जाकर पढ़ने के लिए नहीं टोका।
आत्मविश्वास बढ़ा, अब 12वीं पास करने का लक्ष्य
अश्विन्ता के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं है, बल्कि इससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। अब वे परिवार के फैसलों में अपनी बात खुलकर रखती हैं। उनका मानना है कि हर महिला को पढ़ना चाहिए, ताकि वह अपने हक जान सके। वे मानती हैं कि पढ़ाई सिर्फ नौकरी के लिए नहीं होती, बल्कि एक किसान को भी अपना काम बेहतर तरीके से समझने के लिए पढ़ाई की जरूरत होती है।
कभी डॉक्टर बनने का सपना देखने वालीं अश्विन्ता अब 12वीं पास करना चाहती हैं और अपने सिलाई के काम को भी बढ़ाना चाहती हैं। अश्विन्ता कहती हैं, "पहले लगता था कि पढ़ाई का मौका छूट गया है। लेकिन, प्रगति कार्यक्रम ने मुझे दूसरा मौका दिया। मेरी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि मेरे बच्चों की पढ़ाई कभी न छूटे और जब वे कोई सवाल पूछें, तो मैं खुद उन्हें समझा सकूँ।"
प्रगति: दूसरा मौका, नई उड़ान
एजुकेट गर्ल्स का 'प्रगति' कार्यक्रम एक ‘सेकंड चांस’ प्रोग्राम है। यह कार्यक्रम उन किशोरियों और युवतियों (14 से 29 वर्ष) को शिक्षा का दूसरा मौका देता है, जिनकी पढ़ाई किसी कारण से बीच में छूट गई थी। ओपन स्कूलिंग के जरिए यह कार्यक्रम उन्हें कक्षा 10 की परीक्षा देने और उसे पास करने में मदद करता है। गाँवों में ही लगाए जाने वाले 'प्रगति शिविरों' में प्रशिक्षित स्वयंसेवक और शिक्षक पढ़ाई में साथ देते हैं। इसके साथ ही जीवन कौशल, आत्मविश्वास और फैसले लेने की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाता है। यह कार्यक्रम राज्य ओपन स्कूलों के सहयोग से चलाया जा रहा है। एजुकेट गर्ल्स का लक्ष्य अगले दस वर्षों में एक करोड़ बालिकाओं और महिलाओं को कक्षा 10 तक पहुँचाना है, ताकि वे आगे की पढ़ाई, रोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकें।