मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने रिश्वत के आरोपों की जांच होगी। राज्य के गृहमंत्री मेश चेन्निथला ने विजिलेंस को जांच के आदेश दिए हैं।
यह मामला करीब 20 साल पुराने सड़क निर्माण प्रोजेक्ट से जुड़ा है। उस समय ज्ञानेश कुमार राज्य में PWD सचिव थे।
कोल्लम के ठेकेदार साजन का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) का काम पूरा होने के बाद पेमेंट करने के बदले ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगी थी।
इस समय कांग्रेस की अगुवाई में पूरे देश में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIR में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी साल मई में हुए विधानसभा चुनाव में केरलम में कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF 140 में से 97 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। कांग्रेस ने यहां 10 साल बाद सत्ता में वापसी की है।
साजन का आरोप- रिश्वत के चलते बीन ने आत्महत्या की
साजन के मुताबिक, इंजीनियरों ने करीब ₹17 करोड़ के बिल मंजूर कर दिए थे, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने चेक रोक दिए। इससे मलेशियाई कंपनी PATI-BEL, उसके ठेकेदारों और कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी हुई।
कंपनी के प्रोजेक्ट इंजीनियर ली सी बीन ने उन्हें (साजन को) बताया था कि ज्ञानेश कुमार रिश्वत मांगे बिना भुगतान के चेक जारी नहीं कर रहे हैं।
साजन ने पैसे देकर मामला सुलझाने की बात कही, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने रिश्वत देने से मना कर दिया। ली सी बीन ने ठेकेदारों और कर्मचारियों का बकाया चुकाने के लिए बेंगलुरु में कंपनी के दूसरे प्रोजेक्ट से पैसे लिए थे।
भुगतान न मिलने और रिश्वत मांगने के कारण ली ने 2006 में आत्महत्या कर ली थी। ली ने सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम लिखा था। ली के मलेशिया में रहने वाले परिवार ने भी कंपनी के कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी थी।
पहले हुई विजिलेंस जांच में उनसे और मामले की जानकारी रखने वाले दूसरे लोगों से पूछताछ नहीं की गई थी। वे ली के परिवार, कंपनी के पूर्व कर्मचारियों और अन्य गवाहों को जांच के लिए पेश कर सकते हैं।
ली की मौत के बाद 2006 में भी विजिलेंस जांच हुई थी
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने शुरुआती जांच के बाद केस दर्ज करने के लिए गृह विभाग से अनुमति मांगी थी। सूत्रों के मुताबिक, कानूनी राय लेने के बाद गृह मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। विजिलेंस टीम पहले से ही KSTP प्रोजेक्ट से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। अब इस नई शिकायत की भी जांच की जाएगी।
ली की मौत के बाद 2006 में भी विजिलेंस जांच हुई थी। आरोप साबित नहीं होने पर जांच बंद कर दी गई थी। नई जांच में यह भी देखा जाएगा कि पिछली जांच में आरोपों से जुड़े जरूरी पहलुओं की जांच हुई थी या नहीं।
ज्ञानेश कुमार पर लगे रिश्वत मांगने के आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। विजिलेंस इन आरोपों की जांच करेगी। ज्ञानेश कुमार ने अब तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राहुल गांधी SIR में गड़बड़ी को लेकर लगातार CEC को घेर रहे हैं
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी SIR में गड़बड़ी का आरोप लगाकर लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को घेर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग जान-बूझकर लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहा है। इसके खिलाफ इंडिया अलाइंस ने 1 नवंबर को रैली की थी। राहुल समेत विपक्ष के नेताओं ने उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी लगाई है।
रिपोर्ट में दावा- चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां ज्ञानेश कुमार को भेजी थीं
इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच 14 बार आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज की।
इनमें वोटर लिस्ट, Form-6, नए वोटरों और वोटर डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों की प्रतियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। यह विवाद जून 2025 से बिहार में शुरू हुए SIR के दौरान सामने आया।
अलग-अलग पार्टियां, मकसद एक- ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग। विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने दो दिन से दिल्ली में डेरा डाल रखा है। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के घर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनमहाभियोग पास किया तो रविवार को सोनिया समेत राहुल, प्रियंका, अखिलेश, ममता और तेजस्वी बाकी नेताओं के साथ रामलीला मैदान पहुंचे।