पेरिस: फ्रांस रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के सामने बेबस हो गया है। दरअसल 2000 के दशक में फ्रांस ने अपनी AS-37 मार्टेल एंटी-रेडिएशन मिसाइलों को सर्विस से हटा दिया था। तब से फ्रांसीसी वायु सेना के पास दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली जिसमें रूसी S-400 सिस्टम भी शामिल हैं उसे बेअसर करने के लिए कोई दूसरा हथियार नहीं है। ऐसे में फ्रांस के सामने विकल्प ये है कि वो राफेल-B विमानों का इस्तेमाल ASMP/A क्रूज मिसाइलों के साथ करे लेकिन ऐसी स्थिति में पारंपरिक SCALP-EG क्रूज मिसाइलों का काम उनके लिए रास्ता साफ करना होगा।फ्रांस के डिफेंस सर्किल में इस बात को लेकर टेंशन इसलिए काफी ज्यादा है क्योंकि उन्हें डर है कि रूस के साथ यूरोप की लड़ाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में यूरोपीय विमानों को सबसे ज्यादा डर रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम है जिसमें पाकिस्तान के साथ भारत के संघर्ष के दौरान अपनी युद्ध लड़ने की क्षमता को साबित कर दिया था। एस-400 ने 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तानी अवाक्स एयरक्राफ्ट को मार गिराकर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।एस-400 एयर डिफेंस के सामने कैसे मजबूर है फ्रांस?
फ्रांसीसी पोर्टल Opex360 ने लिखा है कि दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों को नष्ट करने वाले साधनों की कमी की समस्या को हल करने के लिए फ्रांसीसी सेना 140 किलोमीटर की रेंज वाले 'AASM XLR' लॉन्ग-रेंज गाइडेड ग्लाइड बमों को अपनाना चाहती है लेकिन इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन 2028 से पहले शुरू नहीं होगा।
रूसी SAM (धरती से आकाश में मार करने वाली मिसाइल) प्रणालियों के खिलाफ AASM XLR का इस्तेमाल करने के लिए फ्रांसीसी सेना को ASTAC टारगेटिंग पॉड का उपयोग करना होगा। इस पॉड का इस्तेमाल पहले मिराज F1 विमान जिसे फ्रांसीसी वायु सेना से रिटायर किया जा चुका है उसमें एक हथियार घटक के रूप में किया जाता था।AS-37 Martel रिटायर्ड और AASM XLR में 2028 तक की देरी
इस तरह का इंटीग्रेशन सिर्फ F4 मॉडिफिकेशन या उससे नए संस्करण वाले राफेल विमानों में ही किया जाएगा। इसके अलावा वर्तमान में फ्रांसीसी वायु सेना में शामिल मिराज 2000 विमानों में AASM XLR का उपयोग करने की कोई योजना नहीं है।
यह बात भी दिलचस्प है कि फ्रांस खुद AASM XLR समाधान को रूस-रोधी SAM के अस्थायी साधन के रूप में देखता है जब तक कि नई RJ10 या Stratus RS विकिरण-रोधी मिसाइल का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू नहीं हो जाता। हालांकि इसमें एक पेचीदगी यह है कि इस मिसाइल का बड़े पैमाने पर उत्पादन 2030 के दशक में ही शुरू होने की उम्मीद है।डिफेंस एक्सप्रेस ने खास तौर से इस बात पर जोर दिया है कि पिछले बीस वर्षों में फ्रांस ने अपनी दुश्मन की हवाई रक्षा क्षमताओं के बारे में नहीं सोचा और शायद इसलिए क्योंकि वे यूरोप के लिए अमेरिका के बिना शर्त रक्षा समर्थन पर निर्भर थे। इसके अलावा पेरिस में सैन्य नेतृत्व ने यह उम्मीद ही नहीं की थी कि उसे कभी यूरोप में युद्ध करना पड़ेगा।