'भारत ने कर रखा है कब्जा', कश्मीर को लेकर शहबाज-जरदारी ने लगाई दुनिया से गुहार, UNSC का रोया रोना
Updated on
13-07-2026 01:31 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का रोना रोया है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने सोमवार को कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने गुहार लगाई है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के तहत कश्मीर मामले के समाधान के प्रयास का समर्थन करने की मांग की है। दोनों पाकिस्तानी नेताओं ने यह अपील ऐसे समय में की है, जब पाकिस्तान कथित कश्मीर शहीद दिवस मना रहा है।पाकिस्तान का कश्मीर पर प्रोपेगैंडा
पाकिस्तान हर साल 13 जुलाई को कथित तौर पर कश्मीर शहीद दिवस मनाता है, जिसका उद्देश्य भारत के खिलाफ पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा फैलाना है। शहबाज शरीफ ने इस मौके पर जारी अपने संदेशों उसी प्रोपेगैंडा को हवा दी। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अपने अटूट राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन को दोहराती है। हम आत्मनिर्णय के उनके अविच्छेद अधिकार को हासिल करने के उनके न्यायपूर्ण संघर्ष में पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं, जैसा कि UNSC प्रस्तावों में निहित है।"बयान में आगे कहा गया कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर विवाद के शांतिपूर्ण समाधान पर निर्भर करती है। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू करने के लिए भारत पर दबाव डालने की अपील की।
जरदारी ने भारत पर लगाया कब्जा करने का आरोप
वहीं, पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा, आज 95वें कश्मीर शहीद दिवस पर मैं उन 22 कश्मीरी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने आगे कहा, पाकिस्तान के लोग 1931 के शहीदों के बलिदान को याद करने में अपने कश्मीरी भाइयों के साथ शामिल हैं। इसके बाद जरदारी ने भारत के खिलाफ जहर उगला और जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की मौजूदगी का रोना रोया।
उन्होंने कहा 9 लाख भारतीय सशस्त्र बल कब्जा जारी रखते हुए कश्मीरियों को बंधक बनाए हुए हैं। जरदारी के बयान में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म करने के भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले को लेकर तिलमिलाहट भी दिखाई दी। उन्होंने इसे कश्मीरी लोगों की पहचान छीनने और उन्हें अल्पसंख्यक में बदलने का प्रयास बताया।