
मुनि संवेगरत्न सागर की पावन निश्रा में संवत्सरी महापर्व के अवसर पर बारसा सूत्र का वांचन, पांच ज्ञान की पूजा, चैत्य परिपाटी और संवत्सरी प्रतिक्रमण सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने इसमें शामिल होकर आत्मावलोकन और प्रायश्चित किया।
सालभर की भूलों का किया आत्मावलोकन
दोपहर 3.36 बजे संवत्सरी प्रतिक्रमण शुरू हुआ। इस दौरान श्रावक- श्राविकाओं ने पूरे वर्ष के अपने आचरण का आत्मावलोकन किया। मन, वचन और काया से किसी को दुख पहुंचाने, जाने-अनजाने में हुई भूलों और किए गए पापों के लिए प्रायश्चित करते हुए जीव मात्र से क्षमायाचना की गई। संवत्सरी पर मन में किसी के प्रति वैर, द्वेष या कटुता न रहे। प्रतिक्रमण के बाद एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहा गया।
भक्तिभाव से निकली चैत्य परिपाटी
संवत्सरी महापर्व पर लाभार्थी परिवार की ओर से मुनिसंवेगरत्न सागर जी म.सा. को मूल सूत्र यानी बारसा सूत्र बोहराया गया। धर्मसभा में पांच ज्ञान की पूजा के बाद मुनिश्री के मुखारविंद से बारसा सूत्र का वांचन हुआ। मुनिश्री ने श्रावक-श्राविकाओं को संयम, सदाचार और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
इसके बाद मुनिभगवंतों की पावन निश्रा में ज्ञानवल्लभ उपाश्रय से पार्श्वनाथ जिनालय तक चैत्य परिपाटी निकाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल हुए और जिनालय पहुंचकर परमात्मा के दर्शन-वंदन किए।