पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: डॉ दिव्य ज्योति और डॉ संजीव की एंट्री से फंसी BJP, खतरे में प्रोफेसर नवल की जीत!
Updated on
16-09-2026 02:21 PM
पटना: अब तक हर चुनाव में पटना शिक्षक क्षेत्र से एक नया कमाल करने वाले बीजेपी के उम्मीदवार प्रोफेसर नवल यादव की नैया इस बार डगमगा गई है। जनसुराज ने इस बार डॉ दिव्य ज्योति को उम्मीदवार बना कर संकट बढ़ा दिया है। वैसे भी राजद ने कभी जदयू के विधायक रहे डॉ संजीव को उतार कर बीजेपी उम्मीदवार की कुछ कम परेशानी नहीं बढ़ा दी है। आखिर पटना शिक्षक क्षेत्र का चुनाव क्यों इस बार चुनौती पूर्ण और रोचक हो गया है, इस गणित को समझें।
तीन दिग्गजों की टकराहट
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार विभिन्न पार्टी के उम्मीदवारों के बीच तो है ही, साथ ही तीन दिग्गज एक साथ एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। ऐसा माना जाता रहा है कि शिक्षक क्षेत्र का चुनाव में पैसा का खेल खूब चलता है। संयोग से संघर्ष में तीनों उम्मीदवार गांठ के पूरे हैं। बीजेपी के उम्मीदवार तो पटना शिक्षक क्षेत्र से पांच बार एमएलसी रहे हैं। राजद के उम्मीदवार तो पूर्व मंत्री आरएन सिंह के बेटे हैं ही, जदयू से विधायक रहे हैं। डॉ दिव्या ज्योति भी किसी से कम नहीं हैं। ये चाणक्य कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर और चाणक्य फाउंडेशन की सीईओ भी। डॉ दिव्या ने महात्मा गांधी और डॉ भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों से प्रभावित होकर जन सुराज का दामन थाम लिया है।
तीनों मजबूत जातियों का प्रतिनिधित्व
पटना शिक्षक क्षेत्र से पांच बार विजयी रहे प्रो नवल किशोर यादव की पकड़ यादव समुदाय से आने वाले शिक्षकों पर रही है। ये पहले लालू यादव के छत्रछाया में भी राजनीति कर चुके हैं। लालू स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स के प्रोडक्ट और अब बीजेपी की राजनीति करने वाले नवल किशोर यादव ने अपने वोट बैंक में बीजेपी वाले यादव वोटरों को भी शामिल किया है।
राजद के डॉ संजीव का स्ट्रेंग्थ पॉइंट
राजद के डॉ संजीव को भूमिहार जातियों के शिक्षकों का भरोसा तो है साथ ही राजद के MY समीकरण का वोट इनकी मूल ताकत है। चुकी ये जदयू में रहे हैं तो इनका संपर्क लव-कुश वोटरों के बीच भी रहा है।
जनसुराज की डॉ दिव्य ज्योति
जनसुराज की डॉ दिव्य ज्योति शिक्षाविद् तो हैं ही साथ ही अम्हारा गांव की धनाढ्य भूमिहार परिवार से ताल्लुक रखती हैं। इन्हें भी भूमिहार जाति के शिक्षक वोटरों के साथ अन्य सवर्ण खास कर ब्राह्मण शिक्षकों से उम्मीद है।
बांकीपुर उपचुनाव का प्रभाव पड़ा तो?
अगर पटना शिक्षक क्षेत्र के वोटिंग के दिन कहीं बांकीपुर उपचुनाव का प्रभाव हावी हुआ और जातीय बंधन टूट कर वोटिंग हुई तो जनसुराज के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर सकते हैं।
सवर्ण मतों में बिखराव हुए तो?
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में अगर सवर्ण खासकर भूमिहार मतों में विभाजन हुआ तो इसका फायदा प्रो नवल यादव को हो सकता है। लगभग ढाई दशक से एक की शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि रहने की वजह से एंटी-इंकंबेंसी का भी खतरा मंडरा रहा है। ये खतरा टल गया तो ठीक नहीं तो विपक्ष इसका फायदा उठा सकता है।
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