चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि शाश्वत नवपद ओली की आराधना के प्रथम दिवस धर्मसभा में मुनिश्री के मुखारविंद से श्रावक-श्राविकाओं ने श्रीपाल महाराजा और मयना सुंदरी का चारित्र्य वर्णन श्रवण किया। किस तरह से दोनों ने सिद्ध चक्र की आराधना कर मोक्ष को पाया था।
उन्होंने बताया कि शाश्वत नवपद ओली का पर्व जैन समाज द्वारा अनादि काल से मनाया जा रहा है। अनंत लब्धि निधान गौतम स्वामी जी ने राजगृह नगरी में श्रेणिक महाराज को श्रीपाल महाराजा और मयना सुंदरी का चारित्र्य वर्णन किया था। कैसे दोनों ने नवपद की आराधना की थी और कैसे मोक्ष की प्राप्ति की थी।
9 दिन किया जाएगा आयम्बिल तपनवपद ओली के 9 दिवस आयम्बिल तप किया जाएगा। एक समय,एक स्थान पर बैठकर भोजन ग्रहण किया जाएगा। प्रथम दिवस अरिहंत परमात्मा की आराधना के साथ ही सफेद धान से बनी खाद्य सामग्री का सेवन किया गया। सफेद रंग परमात्मा का है इसलिए आज सफेद अर्थात चावल की खाद्य पदार्थ ग्रहण किए गए। केवल एक धान ग्रहण किया जाता है। 6 विघय में तेल, घी, दूध, दही, मक्खन,शक्कर का त्याग रहता है। बगैर तेल,मसाला,खटाई के सादा भोजन ही ग्रहण किया जाता है।