'कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं', CJI सूर्यकांत बोले- अपनी नैतिकता को परखें
Updated on
18-10-2026 11:36 AM
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है, क्योंकि इसमें बौद्धिक स्वतंत्रता के साथ-साथ निष्पक्षता और किसी के बारे में फैसला सुनाने से पहले उसकी बात सुनना जरूरी होता है। बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने ये टिप्पणी की। NLSIU कैंपस में उनकी मौजूदगी का विरोध किए जाने के दो महीने बाद, CJI सूर्य कांत ने दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया।NLSIU कैंपस में बोले CJI सूर्यकांत
यूनिवर्सिटी कैंपस में ‘चांसलर का अध्यक्षीय संबोधन’ देते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि ‘पूर्व का हार्वर्ड’ मानी जाने वाली इस यूनिवर्सिटी ने अपने प्रांगण में कई पार्टियां और अचानक होने वाले फ्लैश मॉब देखे हैं। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में न केवल कानूनों की गहरी समझ होनी चाहिए, बल्कि जो सही है, उसका बचाव करने का साहस भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों और केस कानूनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसे न्याय बनाए रखने, स्वतंत्रता की रक्षा करने और लोगों की सेवा करने के लिए तैयार करना चाहिए।'कानूनी पेशे में नैतिक जिम्मेदारी...'
सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि कानूनी पेशे में नैतिक जिम्मेदारी, बौद्धिक स्वतंत्रता, साहस और उन लोगों की बात सुनने की क्षमता होनी चाहिए, जिनकी आवाज अकसर अनसुनी रह जाती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ग्रेजुएट्स से आग्रह किया कि वे किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले दूसरों की बात सुनें, व्यक्ति और उसके पद के बीच फर्क समझें और किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाए बिना असहमति जताना सीखें। उन्होंने कहा कि कानून स्थिर नहीं होता बल्कि इसे अपनाने वालों की सोच और कार्यों से विकसित होता है।'वकीलों की दलीलें, अनुबंध, सलाह...'
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वकीलों की दलीलें, अनुबंध, सलाह और अदालत के फैसले मिलकर न्याय की एक व्यापक संरचना का निर्माण करते हैं। उन्होंने अलग-अलग पृष्ठभूमि, मान्यताओं और दृष्टिकोण वाले लोगों के साथ जुड़ने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कानून को एक 'जीवंत संवाद' बताया, जो 'न्याय की एक सुरीली धुन' बनाने में योगदान देता है।लॉ ग्रेजुएट्स को दी ये नसीहत
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्नातकों से कहा कि जब उनके सामने समझौता करने, आसान रास्ता चुनने या शॉर्टकट अपनाने की स्थिति आए, तो वे संस्थान से मिले मूल्यों पर अडिग रहें। उन्होंने कानून के सफर की तुलना एक नदी से की, जो प्राचीन ज्ञान के पहाड़ी स्रोतों से निकलकर, कानूनी मिसालों और सिद्धांतों की धाराओं से होती हुई, कानूनी पेशे के विशाल और अनिश्चित समुद्र में जा मिलती है।'ईमानदारी के रास्ते पर लगातार चलते रहने से...'
उन्होंने कहा कि ईमानदारी के रास्ते पर लगातार चलते रहने से ही पेशेवर जीवन में आपकी प्रतिष्ठा बनेगी। ऐसे मौके आएंगे जब आपको समझौता करना आसान लगेगा, अपना काम निकालने के लिए सिद्धांतों से हटने का मन करेगा या दूसरे लोग आसानी से सफलता पाने के लिए छोटे रास्ते अपनाते दिखेंगे। ऐसे समय में इस संस्थान से मिली सीख को अपना मार्गदर्शक बनाएं और यहां सीखे गए मूल्यों पर कायम रहें। कानूनी पेशे के जरिए समाज की सेवा करने से मिलने वाले संतोष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वकीलों को अन्याय दूर करने, लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान के मूल्यों को बनाए रखने से संतुष्टि मिल सकती है।'जब आप इस कैंपस से बाहर निकलेंगे तो..'
सीजेआई सूर्यकांत ने छात्रों से कहा कि जब आप इस परिसर से बाहर निकलेंगे तो केवल एक पेशे में कदम नहीं रखेंगे, बल्कि आपके कंधों पर लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और उनकी सेवा करने की जिम्मेदारी भी होगी। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशा छात्रों के धैर्य और नैतिक मूल्यों की परीक्षा लेगा, लेकिन उन्हें अन्याय दूर करने, स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान को सर्वोपरि रखने का संतोष भी देगा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विद्यार्थियों की सफलता में उनके माता-पिता, शिक्षकों और कर्मचारियों के योगदान को कभी सराहा।