तेल अवीव/तेहरान/रियाद: मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों ने उस इजरायल के साथ संबंध बनाना शुरू कर दिया है जिसे अभी तक वो मान्यता तक नहीं देते हैं। हूतियों के हमलों के बीच सऊदी अरब का जब पाकिस्तान और तुर्की ने मदद करने से इनकार कर दिया तो अब रियाद, तेल अवीव से मदद मांग रहा है। पहली बार अरब देश अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने की इच्छा दिखा रहे हैं और इस दायरे में वे इजरायल के साथ सहयोग करने से भी इनकार नहीं कर रहे हैं।इजरायल पर सऊदी अरब के भरोसा करने की सबसे बड़ी वजह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है। ईरान युद्ध जब परवान पर था और तेहरान लगातार अबू धाबी पर मिसाइलों और ड्रोन की बारिश कर रहा था उस वक्त इजरायल यूएई की मदद के लिए सामने आया था। इजरायल ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम तक यूएई में तैनात कर दिए।ऐसे में खाड़ी देशों में इसे इस बात के सबूत के तौर पर देखा गया है कि इजरायल मुश्किल समय में अपने सहयोगियों का साथ देना जानता है। साथ ही दूसरे देशों ने भी यरूशलेम से संपर्क करना शुरू कर दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्हें भी UAE जैसी रक्षात्मक मदद मिल सकती है। वहीं इजरायल ने सऊदी अरब की मदद करने के लिए हाथ तो बढ़ाया है लेकिन उसने कई शर्तें भी रखी हैं।
ईरान के आक्रामक रुख ने बदली मिडिल ईस्ट की रणनीति!
अमेरिका ने इस ट्रेंड को पहचान लिया है और वे एक नया क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने के लिए साथ-साथ काम कर रहे हैं। एक तरफ वॉशिंगटन अरब देशों को साथ लेकर ईरान के खिलाफ एक गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है। इस क्षेत्र के देशों के नजरिए से एक मुख्य मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित करना है। ये दो ऐसे जलमार्ग हैं जो उनकी नजर में क्षेत्रीय समस्या से बढ़कर वैश्विक समस्या बन गए हैं।ईरान को घेरने के लिए अरब-इजरायल की सीक्रेट बैठक
इस बीच US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पिछले हफ्ते जर्मनी में एक खास बैठक बुलाई। ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से यह अपनी तरह की पहली बैठक थी जिसमें अमेरिका, इजरायल और कई अरब देशों के सीनियर मिलिट्री कमांडर शामिल हुए। Axios के मुताबिक बैठक में शामिल लोगों ने ईरान के साथ युद्ध और इलाके में बढ़ते तनाव पर चर्चा की है।
एक्सियोस के मुताबिक CENTCOM इजरायल और सऊदी अरब के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने पर भी काम कर रहा है ताकि सऊदी अरब को हूतियों का मुकाबला करने में इजरायल की मदद मिल सके। हाल के हफ्तों में सऊदी अरब को हूतियों से कई झटके लगे हैं और वह काफी हद तक अकेला पड़ गया है। पाकिस्तान और तुर्की के साथ जो रक्षा गठबंधन वह बनाना चाहता था वह रियाद की नजर में भरोसेमंद नहीं निकला।सऊदी अरब पर कैसे डोरे डाल रहा इजरायल?
दरअसल हाल के महीनों में सऊदी अरब के रवैये और इजरायल से दूरी बनाने की वजह से यरूशलेम में काफी निराशा है लेकिन फिर भी इजरायली अधिकारी सऊदी अरब की मुश्किलों का मजा लेने की जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। जेरूशलम पोस्ट से एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि ही इजरायली अधिकारी सऊदी अधिकारियों से यह नहीं कह रहे हैं कि 'जाओ तुर्की और पाकिस्तान से मदद मांगो।' बल्कि इजरायल सऊदी की मदद करना चाहता है।
इजरायली अधिकारी ने कहा 'इजरायल इस संकट को रियाद की दिशा बदलने के एक संभावित मौके के तौर पर देखता है। सऊदी अरब को मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े गुट से दूर करना और उसे क्षेत्र के उदारवादी देशों के फिर से करीब लाना। साथ ही यरूशलेम के अधिकारी इस बात पर जोर देते हैं कि सऊदी अरब को भी रिश्ते सुधारने के लिए काम करना होगा और इजरायल को उम्मीद है कि वे अपनी नीतियों में बदलाव करेंगे।'