फर्जी सुप्रीम कोर्ट बनाकर ऐंठे करोड़ों रुपये CBI के ऑपरेशन चक्र VI से कांपा साइबर सिंडिकेट

Updated on 26-06-2026 02:47 PM
जयपुर: अगर आपके मोबाइल पर कोई अनजान वीडियो कॉल आए और सामने पुलिस या कोर्ट की वर्दी में बैठा शख्स कहे कि 'आप डिजिटल अरेस्ट हैं,' तो डरिए मत, बल्कि सावधान हो जाइए। देश में पैर पसार चुके इसी खौफनाक 'डिजिटल अरेस्ट' सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रव्यापी एक्शन लिया है।

CBI ने 'ऑपरेशन चक्र VI' के तहत राजस्थान सहित देश के 16 राज्यों में एक साथ 80 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस महा-कार्रवाई में जांच एजेंसी ने साइबर अपराधियों के उस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्वस्त कर दिया है, जो देश भर में 200 से अधिक बड़े साइबर फ्रॉड को अंजाम दे चुका था।

सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट और 'जज' बनकर वसूली

इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब खुद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने सीबीआई में एक शिकायत दर्ज कराई। ठगों ने चालाकी की सारी हदें पार करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत की हूबहू दिखने वाली एक फर्जी वेबसाइट बना डाली थी।

ये शातिर ठग इसी फर्जी डोमेन का इस्तेमाल कर मासूम लोगों को सुप्रीम कोर्ट के जाली ऑर्डर्स और कानूनी दस्तावेज भेजते थे। पीड़ितों को डराया जाता था कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स तस्करी की जांच चल रही है और उन्हें कैमरे के सामने 'डिजिटल अरेस्ट' रहने का हुक्म दिया जाता था। इस खौफ के बदले उनसे करोड़ों रुपये ऐंठ लिए जाते थे।

राजस्थान समेत 16 राज्यों में 60 स्पेशल टीमें

सीबीआई ने इस गिरोह को दबोचने के लिए 60 विशेष टीमों का गठन किया। इन टीमों ने राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत 16 राज्यों में एक साथ जाल बिछाया। इस दौरान चेन्नई और कोलकाता से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी फर्जी शेल कंपनियां बनाने और 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' (दूसरों के नाम पर खुले खाते) को ऑपरेट करने में शामिल थे। इन खातों के जरिए 'डिजिटल अरेस्ट' से कमाए गए करीब 2 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जा चुकी है।

भारत ही नहीं, विदेशी नागरिक भी थे निशाने पर

सीबीआई की छापेमारी में भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, जाली अदालती दस्तावेज और बैंक ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

शुरुआती जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस गैंग के तार विदेशों से भी जुड़े हैं। ये ठग न सिर्फ भारतीय नागरिकों बल्कि दूसरे देशों के लोगों को भी अपना शिकार बना रहे थे। अब सीबीआई विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क के तकनीकी और वित्तीय ढांचे को पूरी तरह उखाड़ फेंकने में जुट गई है।

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