
उन्होंने पूछा कि कांग्रेस पार्टी हिंदू परंपराओं को ही निशाना क्यों बनाती है। अल्पसंख्यक महिलाओं की स्थिति पर चुप क्यों रहती है। राहुल अल्पसंख्यक महिलाओं की बात क्यों नहीं करते। वे समाज को न बांटें और बेटियों को कम न आंकें।
राहुल ने शनिवार को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता के मुद्दे पर एक घंटा 16 मिनट बात की थी। मनुस्मृति का जिक्र करते हुए महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच को शर्मनाक बताया।
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राहुल ने कहा, 'महिला की पहचान उसके पिता, पति या बेटे से नहीं होती, बल्कि उसकी अपनी पहचान होती है।' मनुस्मृति का जिक्र करते हुए महिलाओं को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच को शर्मनाक बताया।
राहुल ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ 3 तरह से हिंसा होती है। पहली- पैदा होते ही हत्या, दूसरी- शारीरिक अत्याचार, तीसरी- आर्थिक बंदिशें। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, नौकरी, संपत्ति और अपने फैसले लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।